NCERT Class 10 Hindi
Class 10 Hindi: all NCERT books, chapter-wise practice
Hindi papers reward careful reading. For every chapter your child goes over the writer or poet, the central idea, important lines and their भावार्थ, and the kind of short and long answer questions schools usually set.
- 32 chapters
- 1,511 practice questions
- 4 books
Kritika Part 2 (कृतिका)
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Chapter 1 माता का अँचल
शिवपूजन सहाय के इस संस्मरणात्मक अंश में भोलानाथ के बचपन, पिता के स्नेह, माँ की ममता और गाँव की खेल-भरी संस्कृति का जीवंत चित्र मिलता है। अंत में संकट के क्षण में माँ का आँचल बच्चे के लिए सबसे सुरक्षित आश्रय बन जाता है।
Topics: संस्मरण और बाल-दृष्टि, पिता का स्नेह और निकटता, माँ का वात्सल्य और सुरक्षा, बाल-खेल और कल्पनाशीलता, ग्रामीण संस्कृति और लोक-संसार, घटना-क्रम और चरित्र संबंध, भाषा, आंचलिक शब्द और हास्य, शीर्षक, मूल्य और बोर्ड लेखन
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Chapter 2 साना-साना हाथ जोड़ि
मधु कांकरिया का यह यात्रा-वृत्तांत सिक्किम की अलौकिक सुंदरता, स्थानीय जनजीवन, श्रम, सैनिकों के त्याग और प्रकृति-संरक्षण की चेतना को साथ लेकर चलता है। लेखिका के लिए हिमालय केवल दृश्य नहीं, आत्मा को बदलने वाला दर्शन बन जाता है।
Topics: यात्रा-वृत्तांत और आत्म-दृष्टि, गंतोक और सिक्किमी संस्कृति, हिमालयी प्रकृति और सौंदर्य, श्रम, आम जनता और विषमता, पर्यावरण और प्रकृति-संतुलन, जितेन, गाइड और स्थानीय जीवन, सीमा, सैनिक और जोखिम, भाषा, प्रतीक और बोर्ड लेखन
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Chapter 3 मैं क्यों लिखता हूँ?
अज्ञेय इस निबंध में बताते हैं कि सच्चा लेखन भीतर की विवशता को पहचानने और उससे मुक्त होने की प्रक्रिया है। हिरोशिमा के अनुभव से वे अनुभव, अनुभूति, संवेदना, विज्ञान के दुरुपयोग और रचनात्मक ईमानदारी को जोड़ते हैं।
Topics: लेखन की आंतरिक विवशता, कृतिकार, लेखक और बाह्य दबाव, अनुभव और अनुभूति का अंतर, विज्ञान, अणु-बम और नैतिक प्रश्न, हिरोशिमा की छाया और रचनात्मक क्षण, कविता ‘हिरोशिमा’ के बिंब, जिम्मेदार विज्ञान और नागरिक भूमिका, निबंध-शैली और बोर्ड लेखन
Kshitij Part 2 (क्षितिज)
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Chapter 1 सूरदास
सूरदास के भ्रमरगीत में गोपियाँ उद्धव के ज्ञान-योग को प्रेम, विरह और तीखे वाक्चातुर्य से परखती हैं। पदों में ब्रजभाषा, उपमा, व्यंग्य और लोकधर्मी राजधर्म की सुंदर अभिव्यक्ति है।
Topics: सूरदास और सूरसागर, भ्रमरगीत की कथा-भूमि, ज्ञान-योग और प्रेम-मार्ग, विरह और मन की दशा, अनन्य कृष्ण-प्रेम, वाक्चातुर्य और व्यंग्य, राजनीति और राजधर्म, ब्रजभाषा और काव्य-शिल्प
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Chapter 2 तुलसीदास
रामचरितमानस के बालकांड से लिया गया यह अंश शिव-धनुष टूटने के बाद राम, लक्ष्मण और परशुराम के संवाद को प्रस्तुत करता है। इसमें विनय, क्रोध, वीरता, व्यंग्य और अवधी भाषा का सुंदर संतुलन है।
Topics: तुलसीदास और रामभक्ति, धनुष-भंग प्रसंग, राम की विनयशीलता, लक्ष्मण का व्यंग्य, परशुराम का क्रोध और गर्व, वीरता, साहस और विनम्रता, अवधी भाषा, छंद और अलंकार, संवाद-कला और नाट्य रूप
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Chapter 3 जयशंकर प्रसाद
‘आत्मकथ्य’ में जयशंकर प्रसाद आत्मकथा लिखने के आग्रह से असहमत होते हुए अपनी मौन व्यथा, स्मृतियों और विनम्रता को छायावादी बिंबों में व्यक्त करते हैं। कविता निजी जीवन, आत्म-गोपन और काव्य-भाषा की सूक्ष्मता पर सोचने को प्रेरित करती है।
Topics: प्रसाद और छायावाद, आत्मकथा विशेषांक का संदर्भ, आत्मकथा से बचने का कारण, स्मृति, सुख-स्वप्न और पाथेय, विनम्रता और मौन व्यथा, बिंब और प्रतीक, छायावादी भाषा-सौंदर्य, आत्मकथात्मक लेखन और निजता
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Chapter 4 सूर्यकांत त्रिपाठी ’निराला’
निराला की ‘उत्साह’ और ‘अट नहीं रही है’ कविताएँ बादल, क्रांति, नवजीवन और फागुन की सर्वव्यापक आभा को लयात्मक भाषा में व्यक्त करती हैं। इनमें प्रकृति और कवि के अंतर्मन का अद्भुत सामंजस्य दिखाई देता है।
Topics: निराला: जीवन और विद्रोही स्वभाव, उत्साह: बादल का आह्वान, क्रांति, नवजीवन और नूतन कविता, नाद-सौंदर्य और ओज, अट नहीं रही है: फागुन की आभा, प्रकृति और अंतर्मन, काव्य-शिल्प और भाषा, रचना और प्रकृति-अवलोकन
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Chapter 5 नागार्जुन
नागार्जुन की ‘यह दंतुरित मुसकान’ शिशु की मुस्कान में जीवन-ऊर्जा देखती है और ‘फसल’ प्रकृति व मनुष्य के सामूहिक श्रम को सृजन का आधार बताती है। दोनों कविताएँ लोकभाषा, बिंब और जनपक्षधर दृष्टि से भरी हैं।
Topics: नागार्जुन: जनकवि, दंतुरित मुसकान का प्रभाव, शिशु-सौंदर्य के बिंब, माँ, परिचय और आत्मीयता, फसल: प्रकृति के तत्त्व, श्रम और कृषि-संस्कृति, लोकभाषा और काव्य-शिल्प, पर्यावरण और सामाजिक दृष्टि
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Chapter 6 मंगलेश डबराल
‘संगतकार’ कविता मुख्य गायक के पीछे रहने वाले सहायक कलाकार की गरिमा को पहचानती है। कविता सिखाती है कि सफलता अकेली नहीं बनती; उसे स्थायी संभालने, ढाढ़स देने और मानवीय हिचक रखने वाले अनेक सहयोगी बनाते हैं।
Topics: मंगलेश डबराल: कवि-परिचय, संगतकार की भूमिका, मुख्य गायक और सहायक स्वर, संगीत-शब्द और संरचना, ढाढ़स और संभालना, हिचक और मानवीयता, सहयोगियों का सामाजिक अर्थ, मंच, नोटिस और रचनात्मक लेखन
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Chapter 7 स्वयं प्रकाश
‘नेताजी का चश्मा’ में एक छोटे कस्बे की मूर्ति, पानवाले, हालदार साहब और कैप्टन चश्मेवाले के माध्यम से सच्चे देश-प्रेम की पहचान कराई गई है। कहानी बताती है कि सम्मान बड़ी घोषणाओं से नहीं, छोटे जिम्मेदार कर्मों से भी बनता है।
Topics: लेखक और कहानी की भूमिका, कस्बा, नगरपालिका और मूर्ति, हालदार साहब की दृष्टि, कैप्टन चश्मेवाला, पानवाला, समाज और सरकंडे का चश्मा, भाषा-शिल्प और बोर्ड लेखन
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Chapter 8 रामवृक्ष बेनीपुरी
‘बालगोबिन भगत’ में बेनीपुरी ने ऐसे गृहस्थ कबीर-भक्त का रेखाचित्र बनाया है जिसकी सादगी, संगीत-साधना और रूढ़ियों से मुक्ति ग्रामीण जीवन को उजाला देती है। पाठ साधुता को पहनावे नहीं, सत्य, प्रेम और लोकमंगल से पहचानना सिखाता है।
Topics: लेखक और रेखाचित्र विधा, वेश, गृहस्थ जीवन और साधुता, कबीर-भक्ति और संगीत, बेटे की मृत्यु और पतोहू, रूढ़ि-विरोध, प्रेम और मोह, भाषा, ग्राम्य संस्कृति और उत्तर लेखन
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Chapter 9 यशपाल
‘लखनवी अंदाज़’ में यशपाल एक रेल-डिब्बे, दो खीरों और नवाबी नफ़ासत के बहाने बिना कथ्य वाली ‘नयी कहानी’ और पतनशील सामंती दिखावे पर तीखा व्यंग्य करते हैं। पाठ हास्य के भीतर वास्तविकता, वर्ग-आडंबर और कथा-सार की जरूरत समझाता है।
Topics: यशपाल और पाठ की पृष्ठभूमि, रेल-यात्रा और कथावाचक, नवाब साहब का व्यवहार, खीरा-प्रसंग और रसास्वादन, व्यंग्य, सामंती संस्कृति और कथा-विचार, भाषा, शब्द-संपदा और बोर्ड लेखन
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Chapter 10 मन्नू भंडारी
‘एक कहानी यह भी’ में मन्नू भंडारी अपने किशोर जीवन, पिता के अंतर्विरोध, माँ की सहनशीलता, मोहल्ले, शीला अग्रवाल और स्वाधीनता आंदोलन से बने लेखकीय व्यक्तित्व को याद करती हैं। पाठ आत्मकथ्य के माध्यम से बताता है कि परिवार, पढ़ाई और समय की हलचल लेखक को कैसे गढ़ती है।
Topics: लेखिका और आत्मकथ्य, पिता का व्यक्तित्व और प्रभाव, माँ, भाई-बहिन और पड़ोस-कल्चर, हीनभाव, वजूद और लेखकीय निर्माण, शीला अग्रवाल और स्वाधीनता आंदोलन, भाषा, मुहावरे और बोर्ड लेखन
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Chapter 11 यतीन्द्र मिश्र
‘नौबतखाने में इबादत’ उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ का संवेदनशील व्यक्ति-चित्र है, जिसमें डुमराँव, काशी, बालाजी मंदिर, शहनाई, रियाज़ और गंगा-जमुनी संस्कृति एक साथ आते हैं। पाठ बताता है कि सच्ची कला साधना, विनम्रता और सांस्कृतिक समरसता से बनती है।
Topics: लेखक और व्यक्ति-चित्र, डुमराँव, काशी और आरंभिक जीवन, शहनाई, रीड और मंगलध्वनि, सुर-साधना, रियाज़ और इबादत, मुहर्रम, काशी और गंगा-जमुनी संस्कृति, व्यक्तित्व, भाषा और बोर्ड लेखन
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Chapter 12 भदंत आनंद कौसल्यायन
‘संस्कृति’ निबंध सभ्यता और संस्कृति के अंतर को आग, सुई-धागा, न्यूटन, करुणा और त्याग के उदाहरणों से समझाता है। लेखक का आग्रह है कि संस्कृति कल्याण से जुड़ी हो; मनुष्य को बाँटने या विनाश करने वाली शक्ति असंस्कृति है।
Topics: लेखक और निबंध का उद्देश्य, सभ्यता और संस्कृति का अंतर, आविष्कार और संस्कृत व्यक्ति, भौतिक प्रेरणा, ज्ञानेप्सा और करुणा, मानव संस्कृति, कल्याण और असंस्कृति, भाषा, समास और बोर्ड लेखन
Sparsh Part 2 (स्पर्श)
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Chapter 1 साखी
कबीर की साखियाँ मीठी वाणी, अनुभव-ज्ञान, अहंकार-त्याग, ईश्वर की सर्वव्यापकता, विरह और आत्मशुद्धि की सीख देती हैं। दोहा-छंद की छोटी पंक्तियों में गहरी जीवन-दृष्टि छिपी है।
Topics: कबीर और साखी परंपरा, मीठी वाणी और अहंकार-त्याग, ईश्वर की खोज भीतर, जागना, विरह और साधना, निंदक, निर्मलता और आत्म-सुधार, पोथी-पाठ और प्रेम का ज्ञान, सधुक्कड़ी भाषा और काव्य-कला
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Chapter 2 पद
मीराबाई के पद कृष्ण-भक्ति, दैन्य, माधुर्यभाव, मनुहार और विरह की व्याकुलता को राजस्थानी-ब्रज रंग वाली भाषा में व्यक्त करते हैं। भक्त अपने आराध्य से रक्षा भी माँगती है और चाकरी में दर्शन, स्मरण और भक्ति की संपत्ति भी।
Topics: मीरा का जीवन और भक्ति-पृष्ठभूमि, पहले पद की विनय और पौराणिक उदाहरण, दूसरे पद में चाकरी और दर्शन, कृष्ण का रूप-सौंदर्य, भक्ति में दैन्य, माधुर्य और विरह, भाषा-शैली और लोक-शब्द, बोर्ड उत्तर और काव्य-सौंदर्य
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Chapter 3 दोहे
बिहारी के दोहे कम शब्दों में भक्ति, प्रेम, श्रृंगार, नीति और लोक-चतुराई का गहरा संसार रचते हैं। राधा-कृष्ण, आँखों की भाषा, कनक का व्यंग्य और बाहरी आडंबर पर चोट इनके प्रमुख संकेत हैं।
Topics: बिहारी और दोहा-कला, राधा-कृष्ण भक्ति, आडंबर और सच्ची साधना, कनक और लोभ का व्यंग्य, नायिका-नायक और आँखों की भाषा, ब्रज भाषा, शब्द-चमत्कार और अलंकार, भावार्थ और बोर्ड उत्तर
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Chapter 4 मनुष्यता
मैथिलीशरण गुप्त की कविता मनुष्य को अपने लिए जीने से ऊपर उठाकर परोपकार, सहानुभूति, उदारता, गर्व-त्याग और विश्व-बंधुत्व की राह दिखाती है। कविता का refrain बताता है कि सच्चा मनुष्य वही है जो दूसरों के लिए जीता और मरता है।
Topics: कवि और पाठ-भूमि, सुमृत्यु और परहित, उदारता के पौराणिक उदाहरण, सहानुभूति और दया, गर्व-त्याग और ईश्वर-विश्वास, विश्वबंधुत्व और एक पंथ, काव्य-भाषा और बोर्ड उत्तर
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Chapter 5 पर्वत प्रदेश में पावस
सुमित्रानंदन पंत की यह कविता वर्षा ऋतु में पर्वतीय प्रदेश के बदलते रूप, बादलों, झरनों, वृक्षों, ताल और धुंध को चित्रमयी भाषा में सामने लाती है। मानवीकरण और बिंबों से प्रकृति जीवित अनुभव बन जाती है।
Topics: सुमित्रानंदन पंत और प्रकृति-सौंदर्य, पावस में बदलता प्रकृति-वेश, मेखलाकार पर्वत और ताल-दर्पण, झरने और गौरव-गान, तरुवर, उच्चाकांक्षा और नीरव नभ, बादल, धुंध और इंद्रजाल, मानवीकरण और चित्रात्मक भाषा
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Chapter 6 कर चले हम फ़िदा
कैफ़ी आज़मी का यह गीत युद्धभूमि से बोलते सैनिकों की आवाज़ है। वे अपना बलिदान देकर देशवासियों को वतन, आज़ादी और सीमा की रक्षा सौंपते हैं।
Topics: कवि और फ़िल्मी प्रसंग, सैनिक-स्वर, बलिदान और देशभक्ति, प्रतीक और पौराणिक संकेत, उत्तरदायित्व और संबोधन, गीत की भाषा, भावार्थ और बोर्ड लेखन
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Chapter 7 आत्मत्राण
रवींद्रनाथ ठाकुर की इस प्रार्थना में कवि विपत्तियों से बचने की नहीं, उन्हें निर्भय होकर झेलने की शक्ति माँगता है। कविता आत्मबल, पौरुष और ईश्वर में अडिग विश्वास का संदेश देती है।
Topics: कवि और अनुवाद, प्रार्थना की भिन्नता, विपदा और निर्भयता, आत्मबल और पौरुष, भार, सांत्वना और वहन, सुख-दुःख में विश्वास, भाषा, भावार्थ और बोर्ड लेखन
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Chapter 8 बड़े भाई साहब
प्रेमचंद की कहानी छात्रावास में रहने वाले दो भाइयों के संबंध, पढ़ाई के दबाव, खेल की चाह और बड़े होने की जिम्मेदारी को हास्य-व्यंग्य के साथ दिखाती है। अंत में डाँट के पीछे छिपा स्नेह और बचपन की सहजता दोनों उजागर होते हैं।
Topics: लेखक और कथावाचक, बड़े भाई का चरित्र, छोटे भाई का बालमन, शिक्षा और परीक्षा-व्यंग्य, फल, अहंकार और आत्मबोध, भाईचारा और अंतिम प्रसंग, हास्य, मुहावरे और बोर्ड लेखन
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Chapter 9 डायरी का एक पन्ना
सीताराम सेकसरिया की डायरी का यह पन्ना 26 जनवरी 1931 को कलकत्ता में स्वतंत्रता दिवस मनाने के जोश, पुलिस-दमन, सुभाष बाबू के जुलूस और महिलाओं की निर्भीक भागीदारी का आँखों-देखा लेखा है।
Topics: लेखक और डायरी-विधा, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, जन-तैयारी और उत्साह, पुलिस-दमन, नेतृत्व और महिला भागीदारी, प्रत्यक्ष विवरण की भाषा, देशभक्ति और बोर्ड लेखन
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Chapter 10 तताँरा-वामीरो कथा
लीलाधर मंडलोई द्वारा पुनर्लिखित यह निकोबारी लोककथा प्रेम, रूढ़ि, बलिदान और सामाजिक परिवर्तन की कथा है। तताँरा और वामीरो का आत्मबलिदान दो गाँवों को जोड़ने वाली नई सोच का आधार बनता है।
Topics: लेखक और लोककथा, द्वीप-परिवेश, तताँरा का चरित्र, वामीरो और प्रेम, रूढ़ि और संघर्ष, बलिदान और परिवर्तन, भाषा, प्रतीक और बोर्ड लेखन
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Chapter 11 तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र
प्रहलाद अग्रवाल का यह लेख बताता है कि शैलेंद्र ने रेणु की कथा को संवेदनशील फ़िल्म में बदलते हुए कला, लोक-तत्त्व और मानवीय मूल्यों को धन-लाभ से ऊपर रखा। पाठ बोर्ड-उत्तर में तथ्य, आशय और मूल्य-दृष्टि जोड़ना सिखाता है।
Topics: लेखक, भूमिका और संदर्भ, शैलेंद्र, राजकपूर और निर्माण, पुरस्कार, वितरण और बाज़ार, कलाकार का कर्तव्य और गीत-संवेदना, लोक-तत्त्व, अभिनय और चरित्र, भाषा, आशय और बोर्ड लेखन
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Chapter 12 अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले
निदा फ़ाज़ली का यह संस्मरणात्मक निबंध मनुष्य, पशु-पक्षी और प्रकृति की साझी दुनिया को याद कराता है। पाठ करुणा, पर्यावरण-संतुलन और दूसरे के दुख को समझने की मानवीय क्षमता पर प्रश्न उठाता है।
Topics: लेखक और पाठ-भूमिका, करुणा के धार्मिक-सांस्कृतिक प्रसंग, प्रकृति, आबादी और असंतुलन, समुद्र का गुस्सा और मुंबई, माँ, कबूतर और बदलता शहर, भाषा, नुक्ता और आशय-लेखन
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Chapter 13 पतझर में टूटी पत्तियाँ
रवींद्र केलेकर के दो लघु गद्य-प्रसंग 'गिन्नी का सोना' और 'झेन की देन' थोड़े शब्दों में गहरे जीवन-मूल्य रखते हैं। पाठ आदर्श-व्यवहार के संतुलन और वर्तमान क्षण में शांत होकर जीने की सीख देता है।
Topics: लेखक और लघु गद्य, गिन्नी और शुद्ध सोना, आदर्शवाद, व्यवहारवाद और गांधी, जापान की रफ्तार और मानसिक तनाव, टी-सेरेमनी और वर्तमान, भाषा, आशय और बोर्ड लेखन
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Chapter 14 कारतूस
हबीब तनवीर का एकांकी 'कारतूस' वज़ीर अली की निर्भीकता, अंग्रेज़ी कंपनी की कूटनीति और नाटकीय तनाव को तीखे संवादों में सामने लाता है। पाठ साहस, स्वाधीनता-चेतना और एकांकी-कला को समझने का अवसर देता है।
Topics: लेखक, एकांकी और पृष्ठभूमि, अवध, सआदत अली और कंपनी, वज़ीर अली का चरित्र और योजना, खेमे का तनाव और कारतूस प्रसंग, नाट्य-कला, संवाद और चरम बिंदु, भाषा, मुहावरे और बोर्ड लेखन
Sanchayan Part 2 (संचयन)
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Chapter 1 हरिहर काका
मिथिलेश्वर की कहानी एक बूढ़े, संतानहीन किसान की चुप्पी के भीतर छिपे लालच, धर्म के मुखौटे और पारिवारिक स्वार्थ को खोलती है। पाठ जायदाद, बुज़ुर्गों की गरिमा और समाज की तमाशबीन प्रवृत्ति पर कठोर प्रश्न उठाता है।
Topics: मौन कथावाचक संबंध, गाँव और ठाकुरबारी, परिवार, उपेक्षा और जायदाद, महंत की चाल, गाँव की राय और निर्णय, अपहरण और पुलिस प्रसंग, भाइयों का रूपांतरण, अंत, प्रतीक और उत्तर-लेखन
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Chapter 2 सपनों के-से दिन
गुरदयाल सिंह की आत्मकथात्मक रचना बचपन, खेल, गरीबी, स्कूल-भय, अनुशासन और शिक्षक-व्यवहार की खट्टी-मीठी स्मृतियों को सामने लाती है। पाठ बच्चों की मनोवैज्ञानिक ज़रूरतों और शिक्षा में मानवीयता पर विचार कराता है।
Topics: खेल, गरीबी और बालमन, मुहल्ला, बोली और साथ, छुट्टियाँ, होमवर्क और भय, ओमा और बचपन की शरारत, स्कूल, स्काउट और अनुशासन, शिक्षक-व्यवहार और शिक्षा-विमर्श
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Chapter 3 टोपी शुक्ला
राही मासूम रज़ा की कहानी टोपी और इफ़्फ़न की दोस्ती के बहाने भाषा, धर्म, परिवार, अकेलेपन और शिक्षा-व्यवस्था की गहरी पड़ताल करती है। बालमन की सहज आत्मीयता यहाँ बड़ों की परंपरागत दीवारों से टकराती है।
Topics: दोस्ती और नामों का प्रश्न, इफ़्फ़न का परिवार और दादी, भाषा, अपनापन और दादी-संबंध, अम्मी प्रसंग और घर की दीवारें, मृत्यु, तबादला और अकेलापन, स्कूल, अपमान और शिक्षा
Where does the study time go?
In Classes 9 and 10 many children leave home early and come back late after school and coaching. Self-study gets pushed into the last hour of the night, when they are too tired to think clearly. What helps most is knowing exactly which topics deserve that hour.
Tuition is fine, and plenty of children need it. But a tutor with eight or ten children in one batch cannot sit with each of them, and cannot always keep track of what the school did that week. Sometimes the tuition follows its own order of chapters, the child ends up juggling two plans for the same subject, and the confusion shows up in the next test.
NoTuition.in gives that small window some shape: the chapter your child is doing in school, a short activity, practice that explains every mistake, and a clear view for you of what needs work.
Practise Class 10 Hindi the way the book teaches it
The free plan opens one full chapter in every subject, so you can see how your child gets on before you pay anything.