NCERT Class 6 Sanskrit
Class 6 Sanskrit: Deepakam chapter-wise practice
Deepakam starts Sanskrit gently with conversations, shlokas and simple stories. Practice covers word meanings, word forms and short reading passages, with explanations in simple Hindi.
- 16 chapters
- 646 practice questions
Deepakam (दीपकम्)
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Chapter 1 वयं वर्णमालां पठामः
इस पाठ में स्वर, व्यञ्जन, गुणिताक्षर और उच्चारण-स्थान पढ़ते हैं। बच्चा वर्णों को केवल याद नहीं करता, उनके बनने और बोलने का स्थान भी पहचानता है।
Topics: स्वर और उनके भेद, अनुनासिक-स्वर, व्यञ्जन और स्पर्श-वर्ग, अन्तःस्थ, ऊष्म और अयोगवाह, गुणिताक्षर, शब्दार्थ और नामलेखन, उच्चारण-स्थान और परियोजना
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Chapter 2 संयुक्त-व्यञ्जनानि
यह पाठ दो या अधिक व्यञ्जनों के मेल से बने संयुक्त-व्यञ्जनों को पढ़ाता है। बच्चा क्ष, त्र, ज्ञ, द्य जैसे समूहों का वर्ण-वियोग और वर्ण-संयोग अभ्यास करता है।
Topics: संयुक्त-व्यञ्जन की परिभाषा, क्ष, त्र, ज्ञ, द्य का निर्माण, पाठ के संयुक्त-व्यञ्जन उदाहरण, सरल वर्ण-वियोग, संयुक्त पदों का वर्ण-वियोग, वर्ण-संयोग, शब्दार्थ और परियोजना
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Chapter 3 एषः कः? एषा का? एतत् किम्?
इस पाठ में लिङ्ग, वचन, सर्वनाम और क्रियापद का आरम्भिक अभ्यास है। बच्चा एषः/एषा/एतत्, सः/सा/तत् और कः/का/किम् को पाठ के वाक्यों से पहचानता है।
Topics: लिङ्ग और वचन के नामपद, क्रियापदानि और वचन, तद्-शब्दः, सः सा तत्, एतद्-शब्दः, एषः एषा एतत्, प्रश्नरूप, कः का किम्, पाठ-संवाद और शब्दार्थ, अकारान्त, आकारान्त, ईकारान्त
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Chapter 4 अहं च त्वं च
इस पाठ में अहम्/आवाम्/वयम् और त्वम्/युवाम्/यूयम् के प्रयोग सीखे जाते हैं। पेशों, अस्मि-स्वः-स्मः और असि-स्थः-स्थ रूपों से वाक्य बनते हैं।
Topics: अहम् के एकवचन वाक्य, आवाम्-वयम् और उत्तमपुरुष, त्वम्-युवाम्-यूयम् और मध्यमपुरुष, पुंलिङ्ग-स्त्रीलिङ्ग पेशे, म् और अनुस्वार लेखननियम, त्वमेव श्लोक, शब्दार्थ और पुरुष-तालिका
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Chapter 5 संख्यागणना ननु सरला
इस पाठ में संवाद, गीत और तालिका से १ से ५० तक संस्कृत संख्याएँ सीखी जाती हैं। सप्ताह, दिशाएँ, ग्रह, ऋषि और उपस्थितिपत्र जैसे उदाहरणों से गणना का अभ्यास होता है।
Topics: कक्षा-संवाद और कति, संख्यागीत १, १०, संख्या १, ५०, दिशाएँ और स्थान, संख्याप्रसिद्धिः, उपस्थितिपत्र और अभ्यास
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Chapter 6 अहं प्रातः उत्तिष्ठामि
सन्दीपः और खुशी अपनी दिनचर्या बताते हैं। पाठ में समय-पठन, सपाद/सार्ध/पादोन, शिष्टाचार और प्रातः-स्मरण भी आते हैं।
Topics: दिनचर्या का क्रम, समय-पठन, सपाद-सार्ध-पादोन, शब्दार्थ और क्रियाएँ, शिष्टाचार पद, भारतीय समय-परम्परा और श्लोक
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Chapter 7 शूराः वयं धीराः वयम्
यह गीत भारतीयों के शौर्य, धैर्य, सेवा, नीतिपालन और विजय-प्रार्थना को व्यक्त करता है। पाठ में सर्वनाम-रूपों की पुनरावृत्ति भी दी गई है।
Topics: गीत का प्रसंग और वयम्, पहला-दूसरा स्तोत्र, तीसरा-चौथा स्तोत्र, प्रार्थना और भावार्थ, शब्दार्थ, सर्वनाम-रूप पुनरावृत्ति
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Chapter 8 सः एव महान् चित्रकारः
अमृत-उद्यान के वर्णन से बच्चा प्रकृति के रंगों के संस्कृत नाम सीखता है। संवाद के अन्त में परमेश्वर को महान चित्रकार कहा गया है।
Topics: अमृत-उद्यान और प्रकृति, हरित-कृष्ण-रक्त वर्ण, चित्रवर्ण शुक और पाटलपुष्प, श्वेत और बहुवर्णमय प्रकृति, शब्दार्थ और वर्ण-प्रयोग, राष्ट्रध्वज और अभ्यास-वर्ण
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Chapter 9 अतिथिदेवो भव
राधिका बिल्ली और उसके चार शावकों की सेवा करती है। पाठ से अतिथि-सत्कार, अत्र-तत्र जैसे अव्यय, और अस्ति/नास्ति वाक्य सीखते हैं।
Topics: अतिथिदेवो भव का भाव, राधिका और मार्जारी, शावकानां नामानि, अत्र-तत्र-कुत्र अव्यय, अस्ति और नास्ति वाक्य, स्थानबोधक पद और गीत
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Chapter 10 बुद्धिः सर्वार्थसाधिका
शशकराज बुद्धि से गजराज को सरोवर से दूर करता है और शशकों की रक्षा करता है। पाठ लट्लकार, पुरुष-वचन और धातु-पहचान भी सिखाता है।
Topics: सरोवर और शशक-बिल, गजयूध से संकट, शशकसभा और उपाय, चन्द्रप्रतिबिम्ब की युक्ति, बुद्धिः सर्वार्थसाधिका भाव, धातु और लट्लकार
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Chapter 11 यः जानाति सः पण्डितः
यह पाठ प्रहेलिका, शब्द-क्रीडा और षष्ठी-विभक्ति से सम्बन्ध बताना सिखाता है। गुरु-शिष्य, ग्रन्थ-रचयिता और पति-पत्नी सम्बन्धों से रूपों का अभ्यास होता है।
Topics: प्रहेलिका और उत्तर, षष्ठी-विभक्ति का अर्थ, षष्ठी शब्दरूप, गुरु-शिष्य सम्बन्ध, ग्रन्थ और रचयिता, कुटुम्ब, पति-पत्नी और हस्तकुटुम्बकम्
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Chapter 12 त्वम् आपणं गच्छ
राकेश बाजार जाकर घर की वस्तुएँ खरीदता है और मूल्य गिनता है। पाठ आज्ञा/प्रार्थना अर्थ वाले लोट्लकार के रूपों का अभ्यास कराता है।
Topics: अम्बा-राकेश संवाद, नामावली और वस्तुएँ, मूल्य और रूप्यकाणि, आपणिक संवाद, लोट्लकार आज्ञा/प्रार्थना, सुभाषित और निर्देश-वाक्य
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Chapter 13 पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि
यह पाठ सुभाषितों के माध्यम से जल, अन्न, विद्या, उद्यम, अभिवादन और मातृभूमि का महत्त्व बताता है। पदच्छेद, अन्वय और भावार्थ से श्लोक समझने का अभ्यास होता है।
Topics: सुभाषित और त्रीणि रत्नानि, वसुधैव कुटुम्बकम्, उद्यम और अभिवादनशीलता, षड्गुण और देव-सहायता, विद्या-विनय-सुख श्रृंखला, जननी जन्मभूमि और पुस्तकस्था विद्या
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Chapter 14 आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थः महान् रिपुः
माता आलस्य से बचने के लिए भिक्षुक और धनिक की कथा सुनाती है। पाठ परिश्रम का महत्त्व और द्वितीया-विभक्ति के रूप सिखाता है।
Topics: माता-पुत्र संवाद और आलस्य, भिक्षुक और धनिक कथा, शरीराङ्गों का मूल्य, उद्यमसमो बन्धुः श्लोक, द्वितीया-विभक्ति एकवचन, द्वितीया द्विवचन-बहुवचन और सर्वनाम
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Chapter 15 माधवस्य प्रियम् अङ्गम्
माधव स्वप्न में शरीर के अंगों को श्रेष्ठता पर चर्चा करते देखता है। पाठ शरीराङ्गों के नाम, उनके कार्य और सभी अंगों की उपयोगिता समझाता है।
Topics: माधव का स्वप्न, पाद, हस्त और नयन, कर्ण, मुख और उदर, माधव का निर्णय, शरीराङ्ग नाम और कार्य, मधुराष्टकम् और अंग-शब्द
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Chapter 16 वृक्षाः सत्पुरुषाः इव
पर्यावरण-प्रदर्शनी के संवाद और सुभाषितों से वृक्षों के उपकार समझ में आते हैं। पाठ परोपकार, विभक्ति-चिन्ह और लट्लकार-रूपों का अभ्यास कराता है।
Topics: पर्यावरण प्रदर्शनी और संवाद, छायामन्यस्य कुर्वन्ति, दशकूपसमा वापी और वृक्ष-मूल्य, सर्वप्राण्युपजीवनम्, परोपकार-सुभाषितानि, विभक्ति, वचन और लट्लकार अभ्यास
Where does the study time go?
Middle school days are long. Six subjects, projects, the commute and often tuition in the evening. Children spend plenty of hours on studies but get very little quiet time to study on their own, and a gap in one chapter quietly carries over into the next.
Tuition is fine, and plenty of children need it. But a tutor with eight or ten children in one batch cannot sit with each of them, and cannot always keep track of what the school did that week. Sometimes the tuition follows its own order of chapters, the child ends up juggling two plans for the same subject, and the confusion shows up in the next test.
NoTuition.in gives that small window some shape: the chapter your child is doing in school, a short activity, practice that explains every mistake, and a clear view for you of what needs work.
Practise Class 6 Sanskrit the way the book teaches it
The free plan opens one full chapter in every subject, so you can see how your child gets on before you pay anything.