NCERT Class 8 Sanskrit
Class 8 Sanskrit: Deepakam chapter-wise practice
Deepakam starts Sanskrit gently with conversations, shlokas and simple stories. Practice covers word meanings, word forms and short reading passages, with explanations in simple Hindi.
- 16 chapters
- 660 practice questions
Deepakam (दीपकम्)
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Chapter 1 संगच्छध्वं संवदध्वम्
ऋग्वेद के संज्ञान-सूक्त से लिए तीन मन्त्र परिवार, दल, समाज और राष्ट्र में मिलकर चलने, विचार-विनिमय करने और समान संकल्प रखने की प्रेरणा देते हैं। पाठ में लोट्-लकार, सम् + गम् के आत्मनेपदी रूप और अस्मद्-युष्मद् के वैकल्पिक रूप भी समझाए गए हैं।
Topics: दल-सामञ्जस्य की भूमिका, संज्ञान-सूक्त के मन्त्र, पदच्छेद, अन्वय और भावार्थ, एकता, सौहार्द और समान संकल्प, लोट्-लकार और गम्-धातु, अस्मद्-युष्मद् वैकल्पिक रूप, वेद-परिचय और शब्दार्थ
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Chapter 2 अल्पानामपि वस्तूनां संहतिः कार्यसाधिका
केदार-यात्रा में विपत्ति झेल रहे विद्यार्थियों को नायक सुधीर हितोपदेश की कपोत-कथा सुनाता है। चित्रग्रीव, कपोतों और हिरण्यक की कथा बताती है कि धैर्य, बुद्धि, मित्रता और संगठन छोटे जनों को भी बड़ा संकट पार करा सकते हैं।
Topics: केदार-विपत्ति और नेतृत्व, व्याध का जाल और कपोत, चित्रग्रीव की नीति, संघटन से आत्मरक्षण, हिरण्यक और नायकधर्म, ल्यप्-प्रत्यय, विसर्ग-सन्धि और ग्रन्थपरिचय
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Chapter 3 सुभाषितरसं पीत्वा जीवनं सफलं कुरु
दादी और बच्ची की बातचीत से आरम्भ होकर यह पाठ आठ सुभाषितों के माध्यम से जीवन-मार्ग दिखाता है। भारतभूमि का गौरव, गुण-पहचान, नम्रता, पुरुष-परीक्षा, सद्गुण, सत्यसभा, दुर्जन से दूरी और पुरुषार्थ, ये इसके मुख्य सूत्र हैं।
Topics: सुभाषित का प्रयोजन, भारतभूमि और गुण-पहचान, नम्रता और परोपकार, पुरुष-परीक्षा, आठ गुण और सभा, दुर्जन से दूरी और पुरुषार्थ, पदच्छेद, शब्दार्थ और काव्य-पाठ
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Chapter 4 प्रणम्यो देशभक्तोऽयं गोपबन्धुर्महामनाः
जलप्लाव-पीड़ितों की सहायता से आरम्भ हुआ पाठ उत्कलमणि गोपबन्धुदास के करुणा, सेवा, शिक्षा, स्वदेशी और देशभक्ति से भरे जीवन को दिखाता है। पूर्वरूपसन्धि और शब्दार्थ के अभ्यास से भाषा भी मजबूत होती है।
Topics: जलप्लाव और सेवा-भूमिका, करुणा और भोजन-प्रसंग, गोपबन्धु का जीवन और कार्य, देशभक्ति और त्याग, संस्थाएँ और उत्कलमणि, पूर्वरूपसन्धि और शब्दार्थ
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Chapter 5 गीता सुगीता कर्तव्या
कुरुक्षेत्र के गीता-जयन्ती महोत्सव से आरम्भ होकर पाठ भगवद्गीता के चयनित श्लोकों द्वारा स्थितप्रज्ञता, क्रोध से विनाश, गुरु से ज्ञान, भक्त के गुण और वाणी के तप को समझाता है। सप्तमी और पञ्चमी विभक्ति के प्रयोग भी पाठ में आते हैं।
Topics: गीता और सुगीता, स्थितधी और क्रोध-श्रृंखला, ज्ञान-प्राप्ति का मार्ग, प्रिय भक्त के गुण, वाङ्मय तप और प्रियवाक्य, विभक्ति, पदच्छेद और शब्दार्थ
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Chapter 6 डिजिभारतम् - युगपरिवर्तनम्
प्रधानमन्त्रि-संग्रहालय की डिजिटल तकनीकों से शुरू हुआ संवाद डिजिटल भारत के शासन, शिक्षा, वित्त, कृषि, वाणिज्य और साइबर-सुरक्षा तक जाता है। पाठ बताता है कि तकनीक तभी उपयोगी है जब वह नागरिक-सुविधा, समावेशन और सजगता से जुड़ी हो।
Topics: डिजिटल-भारत की भूमिका, संग्रहालय की तकनीकें, डिजिटल शासन और वित्त, शिक्षा, कृषि और वाणिज्य, साइबर सुरक्षा और डिजिटल साक्षरता, क्त और शतृ प्रत्यय
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Chapter 7 मञ्जुलमञ्जूषा सुन्दरसुरभाषा
यह संस्कृत-दिवस के प्रसंग में गाया गया गीत है, जिसमें संस्कृत को सुन्दर देवभाषा, ज्ञान-पेटिका और संस्कृति की रक्षक बताया गया है। पाठ में पदच्छेद, अन्वय, शब्दार्थ और समास की प्रारम्भिक समझ भी आती है।
Topics: संस्कृतदिवस संवाद, मातृभाषा और पोषणक्षमता, मुनि-कवि और जीवन की आशा, श्रुति-सुख और संस्कृति, नवरस, अलङ्कार और शास्त्र, शब्दार्थ, समास और अभ्यास
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Chapter 8 पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्
यह पाठ भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र, सप्तभगिन्यः और सिक्किम, का प्राकृतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक वैभव परिचित कराता है। संवाद, मानचित्र, राज्य-सूची, दिशाएँ और शब्दाभ्यास मिलकर क्षेत्र की विविधता समझाते हैं।
Topics: पूर्वोत्तर क्षेत्र की पहचान, भूगोल और प्राकृतिक वैविध्य, संस्कृति, जनजाति और वंशवृक्ष, राज्य, राजधानी और विशेषताएँ, दश दिशाएँ और शब्दार्थ, प्रकृति-प्रत्यय और व्याकरण अभ्यास
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Chapter 9 कोऽरुक्? कोऽरुक्? कोऽरुक्?
यह पाठ अत्युष्ण भोजन की घरेलू बातचीत से आयुर्वेद की कथा तक जाता है। धन्वन्तरि, वाग्भट, हितभुक्-मितभुक्-ऋतुभुक् और विशेषण-विशेष्य अभ्यास से स्वास्थ्य और भाषा दोनों सीखते हैं।
Topics: गृह-संवाद और अत्युष्ण भोजन, धन्वन्तरि-शुक और वाग्भट, हितभुक्, मितभुक्, ऋतुभुक्, दिनचर्या और प्रार्थना, विशेषण-विशेष्य और ग्रन्थ-परिचय
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Chapter 10 सन्निमित्ते वरं त्यागः (क-भागः)
हितोपदेश से ली गई वीरवर-कथा का प्रथम भाग शूद्रक राजा, वीरवर की सेवा, वेतन-विभाजन और राजलक्ष्मी के दुःखद संवाद तक पहुँचता है। पाठ मुक्त पदविन्यास, अन्वय और भूतकाल-रूपों का अभ्यास भी कराता है।
Topics: कथा-भूमिका और पात्र, सेवा-प्रार्थना और वेतन, वेतन-विभाग और कर्तव्यनिष्ठा, रात्रि का करुणरोदन, राजलक्ष्मी का उपाय, मुक्त पदविन्यास और भूतकाल
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Chapter 11 सन्निमित्ते वरं त्यागः (ख-भागः)
वीरवर-कथा के द्वितीय भाग में परिवार स्वामिधर्म के लिए सर्वस्वसमर्पण को तैयार होता है। सर्वमङ्गला देवी राजा शूद्रक की करुणा और भृत्यवात्सल्य से प्रसन्न होकर वीरवर-सपरिवार को पुनर्जीवन देती हैं; पाठ कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य और भाववाच्य का अभ्यास भी कराता है।
Topics: पूर्वकथा और गृह-प्रबोधन, शक्तिधर का परार्थ-त्याग, परिवार की सहमति, मन्दिर-समर्पण और राजा, देवी का वरदान और फल, वाच्य, अन्वय और सन्धि
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Chapter 12 सम्यग्वर्णप्रयोगेण ब्रह्मलोके महीयते
यह पाठ शुद्ध उच्चारण, सही स्वर और अर्थ-समझ के साथ पढ़ने का महत्त्व समझाता है। इन्द्र-वृत्रासुर कथा, व्याकरण-श्लोक, पाठक-गुण और वेदाङ्ग विद्यार्थी को सावधान वाचक बनाते हैं।
Topics: इन्द्र-वृत्रासुर कथा और स्वर, व्याकरण और अर्थ-परिवर्तन, वर्ण-प्रयोग का मध्यम मार्ग, उत्तम पाठक के षड्गुण, पाठकाधम के षड्दोष, शब्दार्थ और षड् वेदाङ्ग
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Chapter 13 वर्णोच्चारण-शिक्षा
यह पाठ बताता है कि मनुष्य के शरीर में वाणी कैसे बनती है और वर्णों के उच्चारण-स्थान व करण क्या हैं। मुरली के उदाहरण से स्थान और करण का सम्बन्ध सरल बनता है।
Topics: वागुत्पत्ति के चार तन्त्र, वायु की ऊर्ध्व यात्रा, षट् उच्चारण-स्थानानि, मुरली-दृष्टान्त, करण की परिभाषा, जिह्वा करणम्, स्वस्थान करणम्
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Chapter 14 व्याकरणम्
यह व्याकरण-पाठ उपसर्ग, कृत्-प्रत्यय, विभक्ति और सन्धि को उदाहरणों से समझाता है। विद्यार्थी धातु के पहले-पीछे जुड़ने वाले भागों, कारक-विभक्ति और ध्वनि-परिवर्तन के नियम पहचानना सीखते हैं।
Topics: उपसर्ग और अर्थ-परिवर्तन, क्त्वा-प्रत्यय, ल्यप् और तुमुन्, क्तवतु-प्रत्यय, कारक-विभक्तिः, सम्बन्ध-संबोधन-उपपद विभक्ति, सन्धि-नियमाः
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Chapter 15 शब्दरूपाणि
यह पाठ अलग-अलग अन्त वाले शब्दों, सर्वनामों और संख्यावाची शब्दों के रूपों की झलक देता है। विद्यार्थी दधि, वारि, मधु, राजन्, यद्, इदम् और एक-द्वि-त्रि जैसे शब्दों को लिङ्ग-वचन-विभक्ति से जोड़ना सीखते हैं।
Topics: इकारान्त नपुंसकलिङ्ग, उकारान्त नपुंसकलिङ्ग, व्यञ्जनान्त पुंलिङ्ग शब्द, शतृ-प्रत्ययान्त शब्द, सर्वनाम-शब्दरूपाणि, कीदृश-शब्दरूप, संख्यावाचि-शब्दरूपाणि
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Chapter 16 धातुरूपाणि
यह पाठ परस्मैपद और आत्मनेपद धातुओं के लट्, भविष्यत्, लङ्, लोट् और विधिलिङ् रूपों का अभ्यास कराता है। विद्यार्थी धातु, लकार, पुरुष और वचन देखकर सही रूप पहचानना सीखते हैं।
Topics: लट् वर्तमान परस्मैपदम्, भविष्यत्काल रूपाणि, लङ् भूतकाल रूपाणि, लोट् आज्ञार्थक रूपाणि, विधिलिङ् विध्यर्थक रूपाणि, आत्मनेपद सेव्-लभ्, पुरुष-वचन-पहचान
Where does the study time go?
Middle school days are long. Six subjects, projects, the commute and often tuition in the evening. Children spend plenty of hours on studies but get very little quiet time to study on their own, and a gap in one chapter quietly carries over into the next.
Tuition is fine, and plenty of children need it. But a tutor with eight or ten children in one batch cannot sit with each of them, and cannot always keep track of what the school did that week. Sometimes the tuition follows its own order of chapters, the child ends up juggling two plans for the same subject, and the confusion shows up in the next test.
NoTuition.in gives that small window some shape: the chapter your child is doing in school, a short activity, practice that explains every mistake, and a clear view for you of what needs work.
Practise Class 8 Sanskrit the way the book teaches it
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